अन्नदाता की आखत -एक शाम किसान के नाम बाँदा में. - Charity Show for Farmers in Banda


अन्नदाता की आखत -एक शाम किसान के नाम बाँदा में.


'' ‪#‎अन्नदाताकीआखत‬ ''- एक शाम किसान के नाम !आखत में छह दलित किसानों को मिले डेढ़ लाख !बराबर से किसानों के झोली में गई खुशियाँ !

बुंदेलखंड के सात जिलों में बेलगाम हो रही किसान आत्महत्या और सदमे से हुई मौतों के मध्य सूखे का बिगुल सियासत के लिए भले ही चुनावी प्रपंच मात्र हो लेकिन समाज की हिस्सेदारी में जब इंसानियत जागती है तो कोई घास की रोटी नही खायेगा। कोई बुन्देली भूखा नही सो सकता बस एक अदद अन्नदाता के आखत की दरकार है। इसी पशोपेश में देश का प्रथम किसान चैरटी शो अन्नदाता की आखत का आयोजन चित्रकूट मंडल के बाँदा में हुआ है। सामाजिकता की साझी पहल में कुछ भूमिहीन,राशन कार्ड से वंचित और सदमे से हुई मौतों से पीड़ित परिवारों के बुझे चूहला में आग सुलगाने की कोशिश की गई है। गत दिवस बीस दिसंबर को बाँदा के स्थानीय मंगलम मैरिज हाउस में बाँदा के 6 किसान परिवारों को बराबर - बराबर 25 हजार रूपये की मदद(कुल डेढ़ लाख रूपये) बाँदा के समाज से जुटाकर गरीब किसान आश्रित,समाज से वंचित परिवारों को सौप दिया गया है।

कार्यक्रम संरक्षक विधायक दलजीत सिंह एवं दलपत सिंह (पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष)ने अपने हिस्से की बड़ी साझेदारी करके इस सामाजिक अभियान को मुकम्मल किया । आयोजन में बाँदा के 25 प्रबुद्ध दानदाताओं ने सूखे से टूटे किसान की बेबसी को समझा और आखत के रूप में अपना अंशदान दिया है। आयोजन मंच का संचालन कर रहे प्रवास के आशीष सागर ने कहा कि अगर बाँदा के बीस भागीरथ दानदाता साथसाथ नही होते तो ये सामाजिक यज्ञ सफल ही नही होता। आवश्यकता है कि समाज अपनी जिम्मेदारी समझे और किसी अन्नदाता की देहरी में भूख से म्रत्यु या आत्महत्या न होने पाए। योगेन्द्र यादव और एनजीओ के घाघ,उनकी चाटुकारिता करने वाले कोर्ट कमिश्नर सज्जाद हसन, हर्ष मंदर जो बुंदेलखंड को घास की रोटी खिलाकर मीडिया ट्रायल कर रहे है निज हित में उन्हें शर्म आनी चाहिए। अगर बुन्देली किसान घास की रोटी खाता है तो आप अभी तक बेशर्मी में जिंदा कैसे है ? आज प्रथम चरण में इस शो और संवाद कार्यक्रम के माध्यम से जिन 6 बाँदा के किसानो को फौरी मदद की गई है उनमे केस एक - भूमिहीन युवा किसान निवासी गौरीकला-जसपुरा से मृतक राममिलन वर्मा की पत्नी रामदेवी है(इनके आठ संताने है,नौवीं संतान विधवा के पेट में थी जिसको कर्जदार किसान की म्रत्यु के बाद गर्भपात सहमती से करवाया गया है। ये हमारे परिवार नियोजन स्कीम पर तमाचा है कि आज हम कहाँ खड़े है ग्राम्य शिक्षा में ! इस किसान की दुखद म्रत्यु हुई खेत में पलेवा लगाते हुई, बटाईदार किसान था।

केस 2 - इसी क्रम में मजदूर किसान बिट्टन पत्नी रज्जन निषाद निवासी ग्राम शाहपाटन(नरैनी) यह राशन कार्ड से वंचित यह किसान परिवार है साथ ही इसके तीन पुत्र बेलंग(दिलीप कुमार,बेटालाल,दादू जिस्मानी विकलांग ) है।अत्यंत गरीबी का शिकार ये परिवार भुखमरी में है। गाँव का दयामंत्री कोटेदार इन्हे अहसान में मिट्टीतेल देता है ताकि झोपड़ी में उजाला हो जाए।

केस 3 -ऐसे ही नरैनी के रामखिलावन नाई निवासी ग्राम खलारी-गुमानगंज से है इनकी बिटिया रमापति सयानी ब्याह के काबिल है इसकी उम्र 19 साल,कक्षा 12 की छात्रा ये किसान भूमिहीन है और दैनिक मजदूरी कर्ता है और दैनिक मजदूरी से पेट पाल रहा है।

केस 4 -गिरवा के गाँव शेखन पुर निवासी रुखसाना पत्नी मृतक इरशाद की गत अप्रैल माह में गोआ में बीते अप्रैल सदमे से मौत हुई जब खड़ी फसल में ओला पड़े.मृतक की बेवा रुखसाना अब महज तीन बीघा में जो ससुर के नाम है अपनी सात संतानों,एक देवर जो गूंगा,माँ के साथ बसर कर रही है और बड़ी बेटी का निकाह आगामी 31 मई को तय है। इस बिटिया को दूसरी किस्त मदद की निकाह में दी जाएगी, यह परिवार अब तक मुख्यमंत्री से लेकर नेता प्रतिपक्ष और आयुक्त तक कई बार सामूहिक आत्महत्या की चेतवानी दे चूका है बावजूद इन्हे कोई राहत नही मिली। केस 5 -किसान बैजू प्रसाद पुत्र बलदेव परसदा प्रजापति निवासी बरसडामानपुर इसके पास कुल डेढ़ बीघा जमें है जिसमे पत्नी विलांग और एक विकलांग बेटे के साथ 18 साल की बेटी सावित्री के हाथ पीले करने की जद्दोजहद में है।

केस 6 - ग्राम मवई,जमालपुर निवासी मृतक देवीदीन वर्मा (दस साल पहले मर गया था)इसकी पत्नी भी गरीबी में बच्चो को अनाथ छोड़कर चली गई और एक मात्र कमाने वाला बड़ा बेटा हाल ही में 7 दिसंबर को बीमारी से मर गया है, ये सूरत में मजदूरी कर्ता था। अब मासूम पूनम और संजय को गरीब मामा रामावतार पाल रहा हैं। दोनों बच्चे छतविहीन झोपडी के सामने मामा की दया पर जिंदा है ! इन्ही मुफलिस किसानो की मदद आज कार्यक्रम में की गई है।

 

 

 

 

 

अन्नदाता के दानदाता -

  • संरक्षक विधायक दलजीत सिंह,
  • आईडी पाण्डेय(महानिदेशक जल संस्थान,बाँदा),
  • राकेश साहू(भारत गुटखा वाले),
  • अरुण निगम(केसीएनआईटी),
  • मदनमोहन साहू(चन्द्रकमल परिवार),
  • छंगा सिंह,
  • डाक्टर रफीक,
  • डाक्टर नरेंद्र गुप्ता,
  • डाक्टर एनडी शर्मा,
  • विनोद जैन,
  • सुनील बाजपेई (महालक्ष्मी कलर बैंक),
  • पप्पू शिवहरे,
  • विशम्भर सिंह लालू,
  • बासु मिष्ठान,
  • शकील अली,
  • प्रभाकर अवस्थी,
  • डाक्टर विक्रम सिंह,
  • डाक्टर मोनिका सक्सेना,
  • तुफैल अहमद (मसोनी,कालिंजर प्रधान),
  • कैलाश अग्रवाल,
  • डाक्टर करण राजपूत,
  • दया ज्वैलर्स,
  • अरबिंद सिंह मिंटू,
  • राजेश दीक्षित,
  • सुमनलता पटेल.

आयोजन में नेपाल के दांग जिले से आई अभिनेत्री रायल कल्पना ने बुंदेलखंड के किसानों के प्रति संवेदना से जुड़ाव व्यक्त किया और कहा कि मै और यांग्शु श्रेष्ठ हमेशा आपके साथ है। नन्ही यांग्शु ने बुंदेलखंड की आवाम का मन मोह लिया तो वही बिटिया मन्नत ने अपनी गुल्लक से सभागार में 5346 रूपये की हिस्सेदारी अदा करके सबकी आँखे नम की ! मन्नत ने अपनी मिट्टी की गुल्लक को जैसे ही आखत के लिए तोडा सभागार में एक बरगी सन्नाटा छा गया ! सबने उसके हौसले को सलाम किया है !

गौरतलब है कि रायल कल्पना नेपाल में कांग्रेस ट्रेड यूनियन से पंद्रह जिलों की महिला जिला अध्यक्ष भी है, उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार के नेपाल में लगाये गए नाकाबन्दी पर सवाल करते हुए कहा कि एक लोकतान्त्रिक देश में सिर्फ इसलिए राशन सामग्री के आवागमन में पाबन्दी लगाना आवाम के साथ अन्याय है क्योकि हम लोकतान्त्रिक विचार दे रहे है,हमने दशको की राजशाही का अंत करके एक संवैधानिक धर्मनिरपेक्ष सरकार बनाने का खाका बुना है !

मोदी ध्यान रखे कि हममें अतिहिंदुवादिता नही है। रायल कल्पना ने अपनी बेबाकी से मंच को स्तब्ध कर दिया ! सीधी(मध्यप्रदेश)से इंद्रवती नाट्य समिति के नीरज कुंडेर और रोशनी प्रसाद मिश्रा की टीम ने किसान आत्महत्या पर मार्मिक मंचन करके वाहवाही ली। दीवारी लोककला में रमेश पाल के साथियों ने बुन्देली जौहर दिखलायां वही आयोजन के साझा अभियान में शामिल एसीडी स्टूडियों के के बच्चो ने अपनी नृत्य कला कौशल से श्रोताओं को रोमांचित किया, सभी प्रस्तुति किसान पर आधारित रही।

'अन्नदाता की आखत' के अध्यक्ष सुधीर जैन ने बुन्देली किसान आत्महत्या को रोकने के लिए नेचुरल सम्पदा के दुर्दांत दोहन पर अविलम्ब प्रतिबन्ध लगाने की मांग की। मुख्य वक्ता पियूष बबेले (दिल्ली)ने कहा कि ऐसे आयोजन किसानों में हौसला और जीवन की आशा की जीवित रखेंगे कि समाज इतना क्रूर नही हुआ है, मोटे आनाज को घास बतलाने वाले बुन्देली किसानों का अपमान कर रहे हैं। झाँसी से आये जीशान अख्तर,अरिन्दम घोष(टाइम्स आफ इंडिया),संतोष पाठक,शिवनारायण सिंह परिहार(बुंदेलखंड अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन,भानु गुट)ने आज किसानों से पुरजोर वकालत की अब नही जागे तो लोकसेवक आपको गुलाम बना लेगा और किसानी बड़े लम्बरदार किसान ही कर पाएंगे जो पूंजीपति के ठेकेदार होंगे। अतिथि दीर्घा में शामिल पत्रकार अरुण खरे,गोपाल गोयल,टिल्लन रिछारिया(दिल्ली ) ने बाँदा की इस अनूठी समरसता का आभार प्रकट किया हैं । बाँदा के स्थानीय लोगो में पूर्व मंत्री जमुना प्रसाद बोस,प्रभाकर अवस्थी,विनोद जैन,डाक्टर नरेंद्र गुप्ता,मुहोम्मद रफीक,डाक्टर एनडी शर्मा ,राकेश साहू (भारत गुटखा वाले),मदन साहू(चन्द्रकमल श्री परिवार,सारंग),बाबूलाल गुप्ता,उमाशंकर पाण्डेय,बीडी गुप्ता,सीपी दीक्षित ललित आदि की सहभागीता रही हैं।

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निशा गुप्ता और मुकुल गुप्ता सहित,वीरेन्द्र गोयल(सांई इंटरप्राइजेज),संतोष पटेल(संतोष बस सर्विस),ब्रजेन्द्र पटेल,विवेक सिंह कछवाह(एडवोकेट),शैलेन्द्र मोहन श्रीवास्तव,कैप्टन सूर्य प्रकाश मिश्रा(बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा),सूर्यप्रकाश तीवारी,उमेश यादव ने आये हुए अतिथियों,दानदाताओं का आभार प्रकट किया है।युवा टीम ने अपने अगले पड़ाव में चित्रकूट,महोबा,हमीरपुर और झाँसी में यथा शीघ्र आयोजन की बात कही है !

आयोजन दिनांक: 24 दिसंबर 2015

By: आशीष सागर (बाँदा से)