सन्कलन : बुन्देलखन्ड एक नज़र
बुन्देली लोक सहित्य मे लोक जीवन के नाना अनुभवो के सार समाए हुए है जिसे किसी शिष्ट या शास्त्रीय साहित्य मे नही पाया जा सकता है. इसमे ऐसे शब्द भी मिलेगे जिन्हे शिक्षित लोग अपशब्दो की श्रेणी मे रखते है किन्तु बुन्देली जीवन मे जो कुछ वास्तविक व यथार्थ है चाहे वह सभ्यता की श्रेणी मे हो अथवा असभ्यता की श्रेणी मे उसके बिना बुन्देली जन जीवन की पूरी तस्वीर सामने नही आ सकती है .......
बुन्देली लोक व्यहवार वहा के लोक जीवन का अविभाज्य अन्ग है और उसे बुन्देली साहित्य के माध्यम से काफी कुछ समझा जा सकता है. यह बुन्देली लोक व्यहवार सनातन से स्वत: ढलता, बनता और बिगडता चला आया है. लेकिन आधुनिकता के साथ तेजी से हो रहे सन्क्रमण के वर्तमान दोर मे जैसे जैसे लोक जीवन का रन्ग ढन्ग बद्लते जा रहा है वैसे वैसे लोक व्यहवार व लोक जीवन का स्वरूप भी क्रमश: बदलते जा रहा है. इस वेब पेज पर आपको ऐसी तमाम बाते मिलेगी जो बुन्देली क्षैत्र के अनेक हिस्सो मे अब या तो लुप्त हो चुकी है या लुप्त होने के कगार पर है.Related Articles :-
Courtesy : Mishrafamily.tripod.com
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