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(INTERVIEW) किरण देवी भारती : बुंदेली गायिका व नौटंकी गायिका

गरीबी और जीवन की जद्दोजहद के बाद शोहरत की बुलंदियों तक पहुंची किरण देवी भारती का नाम परिचय का मोहताज नहीं रहा। बेडि़न नर्तकी किरण देवी को कबीर कला वारिध सम्मान, अंबेडकर सम्मान व लोक कला रत्न जैसी उपाधियों से अलंकृत श्रीमती भारती राष्ट्रीय स्तर पर बुंदेली गायिका व नौटंकी गायिका के रूप में जानी जाती हैं। बांदा में नौटंकी कला को जीवंत करने में काफी प्रयास किये हैं। वह बुंदेलखंड इकाई की सचिव भी हैं।
बेडि़या जाति की 44 वर्षीय किरण देवी भारती उत्तरप्रदेश के ग्राम मेहदिया थाना चांदपुर जिला फतेहपुर की मूल निवासी है। शिक्षा कोई खास नहीं बस लिखना-पढ़ना जानती हैं। इनके पिता गांव में दूसरों की खेती किसानी करते थे। आठ वर्ष की उम्र में पिता का साया उठ गया। परिवार में किरण देवी समेत चार बहनें, तीन भाई हैं। सभी नौटंकी में नाचने-गाने का काम करते हैं।
एक नयी जिंदगी जीने के मकसद से श्रीमती भारती ने अपने को पूरी रह बेडि़या समाज के प्रति समर्पित कर दिया। लोक कला के इस क्षेत्र में बेडि़न समाज को नयी राह दिखायी व लोक कला के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण सफलताएं भी मिली। उन्होंने बताया कि नौटंकी के नाम पर अब फिल्मी गाना तथा नाच जिसमें सजी-धजी नर्तकिया लोगों को लुभाती हैं। आज कल इन्हीं के लिए दर्शक खिंचते हैं। भारती ने पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा कि इसी मनोवृत्ति के चलते परंपरानुसार स्तरीय प्रदर्शन करने वाली मंडलियां व अच्छे कलाकार पिछड़ते जा रहे हैं।
गुलाब बाई की निकट सहयोगी रह चुकींभारती बेडि़न समाज में कुप्रथाओं और अशिक्षा को लेकर आहत हैं। वह बताती हैं कि इस समाज की औरतों के बच्चा पैदा होते ही ठोकर मार दी जाती है। इस मामले में शासन-प्रशासन से भी कोई मदद नहीं मिलती। समाज के लोगों को वर्षो से मिलने वाली वृद्धावस्था पेंशन की भी समाप्त करने की साजिश हो रही है। जिसके लिए उनका संघर्ष जारी रहेगा। किरण देवी की आरजू है कि वह खुद की नौटंकी चलाये। वह आभार व्यक्त करती हैं कृष्ण मोहन सक्सेना, श्रीमती त्रिपुरारी शर्मा एवं पूर्व चुनाव आयुक्त रामदास सोनकर का जिनके सहयोग से उन्हें सरकार की आर्थिक सहायता और यह मुकाम मिला।
Courtesy: Jagran Hindi
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