REPORT

Report

Rest House and Hotels in Orcha

Orcha Rest House and Hotels

The Dak Bunglows and rest houses are maintained by the Government departments such as forest, irrigation, P.W.D. The following table shows the situation and category of the accommodation available in the rest house of the district.

Sr. No.

Name of The Place

Situated on the Road

Accommodation

1

Circuit House Tikamgarh

Tikamgarh-Jhansi Road

2 Suits

2

Rest House Tikamgarh (Old)

Tikamgarh-Jhansi Road

3 Suits

3

Rest House Tikamgarh (New)

Tikamgarh-Jhansi Road

3 Suits

4

Rest House Baldeogarh

Tikamgarh-Gulganj Road

2 Suits

5

Rest House Jatara

Tikamgarh-Mau Road

2 Suits

6

Rest House Palera

Jatara-Garroli Road

2 Suits

7

Rest House Niwari

Prithvipur-Niwari Road

2 Suits

8

Rest House Prithvipur

Tikamgarh-Jhansi Road

2 Suits

9

Rest House Orchha

Tikamgarh-Jhansi Road

4 Suits

10

Rest House Lidhora

Jatara-Lidhora Road

2 Suits

(News) योग के नाम पर ठगी

योग के नाम पर ठगी

खजुराहो से अठारह किलो मीटर दूर ,जंगल में योग के नाम पर ठगी का एक शिविर चल रहा है | इस शिविर में १४५० यूरो डालर दीजिये , सिर्फ एक माह का प्रशिक्षण लीजिये और योग गुरु बन जाईये |है ना ये योग की माया, रामदेव ने देश विदेश में योग को इतना लोकप्रिय बना दिया की लोग अब इसका धंधा करने लगे हें |\  हालेंड की फर्म के इस शिविर के बारे में यहाँ के लोग और प्रशासन को भी जानकारी तब लगी जब यहाँ से भागी दो युवतियों ने पुलिस को शिकायत की | अब आप ही अंदाजा लगा सकते हें की देश की ख़ुफ़िया तंत्र और सुरक्षा तंत्र कितना चाक चोबंद है |

(Report) 40 Child Labour Schools Closed in Bundelkhand; चालीस बालश्रम विद्यालय बन्द और बच्चे सड़कों पर

चालीस बालश्रम विद्यालय बन्द और बच्चे सड़कों पर

1. राष्ट्रीय बालश्रम परियोजना के संचालन में हुई 85,08,928.00 रूपयों की धांधली
2. समाज सेवी संगठनो पर था बालश्रमिको के भविष्य संवारने का दारोमदार
3. बुन्देलखण्ड में मौजूद हैं 8,880.00 बालश्रमिक, चित्रकूट मण्डल में नही खुला किशोर बालगृह

बुन्देलखण्ड के सात जनपदो में से

(Report) संकटग्रस्त बुन्देलखण्ड विनाश का संकेत

संकटग्रस्त बुन्देलखण्ड विनाश का संकेत

जंगल , नदी , पर्वत , जमीन , गांव , किसान, मजदूर, जंगली और पालतू जानवर जब सभी पर संकट आये तो क्या कहा जायेगा ? आज बुन्देलखण्ड मे सब ओर विनाष की झलक दिख रही है। जंगलों का सफाया, ग्रेनाइट पत्थरों तथा हीरा की विस्तृत खदानें, बिजली की कृत्रिम आवष्यकतापूर्ति हेतु जल-विद्युत की व्यवस्था नकार कर कोयले पर आधारित प्रदूषणकारी स्थापनाओं की योजना , इन कार्यों हेतु देषी तथा विदेषी निवेष, उद्योग और विकास के नाम पर रोज बढ़ती स्टोन- कषर्स की संख्या, ऊँचाई से भी अधिक गहराई तक कटते तथा खुदते हुये पहाड़, सूखती हुई सिंध, पहूज, धसान, बेतवा, केन, और चित्रकूट की मंदाकिनी जैसी पवित्र एवं निर्मल जलवाही नदियाँ, उस पर भी नदियों के जोड़-तोड़ पर गहराती जल-राजनीति, अभयारण्यो में भी वनराजों की हत्या, भटकने और कटने के लिये बहिष्कृत अथवा बेची जाने वाली गोमातायें, बैलों को रौंदते हुये ट्रैक्टर्स, साल दर साल घटती हुई जमीन की ताकत, घटती पैदावार, लुप्त होते हुये कालजयी बीज, रूठते बादल, सपरिवार पलायन के लिये मजबूर लोग और आत्महत्याओं के बढ़ते आंकड़े कौन सी कहानी सुना रहे है ?

सतही पानी के सूखने के साथ जिस तरह जमीन के अन्दर का पानी बाहर उलीचा जा रहा हैै , परिणामतः भूगर्भ जल नीचे जा रहा है उससे नगरों तथा गावों मे पीने का पानी की किल्लत बढ़ रही है । पेड़ पौधों के साथ जो बलात्कार हो रहा है और जिस तरह के उद्योग यहा डाले जा रहे हैं वह यहा की जमीन तो नष्ट करेंगे ही , हवा में जरूरी आक्सीजन को भी नही बख्शेंगे। इन सबसे जो लाभान्वित होने वाले हैं ऐसे समाज के चन्द नेता, नौकरषाह, व्यापारी तथा टेक्नोक्रेट्स क्या भविष्य में बिना आक्सीजन जिन्दा रह पायेंगे , क्या बाहर से आयात किये भोजन, पानी तथा हवा के बल पर उनकी भावी सारी पीढ़ियां अपना जीवनयापन कर सकेंगी ?

(News) Bundelkhand: More than 500 debt ridden farmers suicides in 5 months

Bundelkhand More than 500 debt ridden farmers suicides in 5 months

More than 500 debt ridden farmers have committed suicide in the last 5 months Bundelkhand despite a Rs 7000 crore special package from the Centre.

The story has now become a part of Bundelkhand's folklore with eight years of drought, starvation and debt, due to which there have been 2945 farmer suicides in the last 10 years and 519 farmer suicides in the last five months alone.

Veerpal Rajput, 45-year-old, is now part of that statistic as he was found hanging from a tree in his own fields after failing to pay back Rs 1.5 lakh he had borrowed. The bank had been sending him notices to pay up and the pressure was killing says his son Lakhanlal.

It is a story that repeats itself across the 13 arid districts of Bundelkhand everyday as desperate poor farmers are driven to suicide because of a harsh drought and mounting debt. The story has constantly been underplayed by the Uttar Pradesh government because it's just too embarrassing to acknowledge.

(Report) कर्ज और मर्ज से खुदकुशी है - बुन्देलखण्ड का सच

कर्ज और मर्ज से खुदकुशी है - बुन्देलखण्ड का सच !

  • भूख से लड़ रहे मृतक किसान के तीन अनाथ बच्चे

  • दो बीघा जमीन बैंक के पास गिरवी कैसे जलेगा फांकाकसी में चूल्हा

  • मानवता ने बढ़ाया एक कदम मगर शासन और प्रशासन मौन है

बुन्देलखण्ड- ‘‘ जीकर मरो, मरकर मत जियो ’’ इस तल्खियत भरे शब्दों में छुपा है बुन्देलखण्ड का सच। कर्ज और मर्ज से खुदकुशी, आत्मदाह बुन्देलखण्ड की पिछले तीन महीनों में हकीकत बनके उभरी है। 18 जून 2011 को जनपद बांदा के बघेला बारी (नरैनी ब्लाक), थाना फतेहगंज के 42 वर्षीय युवा किसान सुरेश यादव ने सुबह 4 बजे अपने पीछे तीन बच्चों क्रमशः विकास यादव उम्र 15 वर्ष जो इस वर्ष 10वीं की कक्षा में बिना स्कूल गये 54 प्रतिशत अंकों के साथ विज्ञान वर्ग में उत्तीर्ण हुआ है, पुत्री संगीता उम्र 13 वर्ष ड्रापआउट, अन्तिमा उम्र 8 वर्ष ड्रापआउट सोता हुआ छोड़कर अपने बैंक के पास बन्धक बने दो बीघा जमीन की नोटिस जारी होने से दहशत में आकर आत्महत्या कर ली। सुरेश यादव पर त्रिवेणी ग्रामीण बैंक बदौसा का 21 हजार रूपये और गांव के साहूकार का 50 हजार रूपये कर्ज था। वर्ष 2008 में मृतक सुरेश यादव की पत्नी सरस्वती कैंसर की बीमारी से जूझती हुयी इस दुनिया को अलविदा कह चुकी है। मां के गुजर जाने के बाद तीन बच्चों में संगीता ही घर का चूल्हा चैका विद्यालय छोड़ने के बाद करती थी।

गौरतलब है कि पत्नी सरस्वती की मृत्यु के पश्चात् मृतक सुरेश यादव मानसिक रूप से तन्हा, अवसाद ग्रस्त और क्षय रोग से पीड़ित हो गया था। कुल चार बीघा जमीन में से दो बीघा जमीन उसने पहले ही पत्नी के इलाज में बेंच दी थी और इधर बच्चों के पालन पोषण व खेती को करने के लिये सुरेश ने त्रिवेणी ग्रामीण बैंक बदौसा से 21 हजार रूपये, साहूकार से 50 हजार रूपये बतौर कर्ज ऋण लिया था। किसान सुरेश के पुत्र विकास द्वारा ही शेष बची दो बीघा जमीन में रही सही खेती की जाती थी। क्योंकि सुरेश पत्नी के चले जाने के बाद से ही बिस्तर पकड़ चुका था। गांव वालों के बयानों के मुताबिक क्षय रोग से पीड़ित सुरेश को नरैनी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, जिला अस्पताल बांदा से नियमित रूप से डाट्स की दवायें भी उपलब्ध नहीं होती थी। बड़ी बिटिया संगीता की बढ़ती हुयी उम्र के साथ उसके ब्याह की चिन्ता और विकास, अन्तिमा के भविष्य की ऊहा-पोह में पिसते हुये सुरेश ने 18 जून 2011 को इस समाज और लोकतंत्र से हमेशा के लिये पीछा छुड़ाने का दुर्दान्त फैसला कर लिया। अपने ही खेत पर खून की उल्टियों के साथ मृतक सुरेश इस दुनिया से चला गया। जब बच्चे जागे और पिता को पास में नहीं पाया तो बाहर निकलकर चिल्लाने लगे। गांव वालों के सहयोग से जब पिता को ढूंढ़ा गया तो उसकी लाश अपने ही दो बीघा बन्धक बने बंजर खेत में पायी गयी।

बताते चले कि मृतक सुरेश के पुत्र विकास के पास इतना भी पैसा नहीं था कि वह अपने पित्रृ ऋण से मुक्त होने के लिये पिता को अन्तिम अग्नि समर्पित कर पाता। गांव वालों ने आनन-फानन में मृतक की लाश को एक चादर में लपेटकर रसिन बांध में प्रवाहित कर दिया।

(Report) Bundelkhand: Currupt officials exploit the grieving families of dead farmers

http://media2.intoday.in/indiatoday/images/stories/bundelkhand_farmers-125_071411010126.jpgBundelkhand Currupt officials exploit the grieving families of dead farmers

In Uttar Pradesh's most impoverished region, Bundelkhand, government officials feed off not just the living but also the dead. Headlines Today has exposed how corrupt officials exploit the grieving families of farmers, who have committed suicide.

In a visit to Bundelkhand in 2008, AICC general secretary Rahul Gandhi repeated a phrase borrowed from his father Rajiv Gandhi: "Out of 100 paise, only 15 paise reaches the poor".

While travelling through this dustbowl in UP, it is easy to see why. As Headlines Today weaved its way through large tracts of Bundelkhand, it encountered a familiar story.

Bundelkhand is the place that was most frequented by politicians last year including Prime Minister Manmohan Singh. Eighty per cent of the population in Bundelkhand is dependent on agriculture out of which 76 farmers are debt-ridden.

Bundelkhand also got a relief package of Rs 7000 crore and yet eight out of every 10 farmers cannot repay their loan. Above all, this is the place where 1400 farmers have committed suicide in the last two-and-a-half years, but the UP government has not acknowledged even a single one of them.

Says Omprakash Singh, DC, Chitrakoot-Banda region, says, "Not a single farmer in Bundelkhand has committed suicide because of debt. We have investigated a lot of cases and found out that the reason for suicides is not indebtedness but personal reasons like family disputes and illness."

Q: It has been reported that a lot of government officials are taking commission in the relief schemes for the farmers. Are you aware of it?
DC: We have no such information. If we get complaints, we take action, but we haven't got one till date."

It's a claim that is disputed by several families in the area.

"The monsoon does not reach on time, which wasn't the case back then. Those who have committed suicide incurred heavy losses in farming. They couldn't repay their loans and have to sell their land at times. Just a meal of plain chapattis will at least cost Rs 10. How will they eat? The money borrowed for seeds itself is not reimbursed, forget the profit," says Ganesh Prasad Dwivedi, a farmer.

(Report) बांदा में कांशीराम आवास हो गए अमीरों के हवाले

सरकारी कर्मचारी, व्यापारी और तथाकथित पत्रकारों की पनाह बने कांशीराम आवास

  • असहाय निरीह और गरीबी से आजिज सैकड़ो तीमारदारों को नही मिले बी0पी0एल आवास
  • 200 से 300 बीघा के कास्तकारों को बांटे गये गरीबों के आशियाने
  • बीस करोड़ की लागत वाले 1500 आवासों में 940 की खुलने लगी पोल
  • जिला शहरी विकास अधिकरण (डूडा) ने नही दी आर0टी0आई0 की सूचना

जनपद बांदा में कांशीराम शहरी गरीब आवासीय योजना के तहत निम्नीपार और हरदौली घाट मोहल्ला स्थित कुल 1500 आवास निरीह , असहाय और निराश्रित बी0पी0एल0 कार्ड धारको के लिये बनाये गये थे। कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग, जिला विकास अभिकरण ने बिल्डिंग निर्माण का काम झांसी की फर्म मेसर्स ओम शांति बिल्डर्स को दिया था तथा जिला विकास अभिकरण के सहायक अभियंता हरगोविन्द और अवर अभियंता अखिलेश कुमार ने पूरे निर्माण कार्य का मेजरमेंट विगत 14 मई 2009 को किया था। गौरतलब है कि 23 फरवरी 2011 को मुख्यमंत्री उ0प्र0 मायावती जी द्वारा कांशीराम आवास योजना का लावलश्कर के साथ शिलान्यास यह कहते हुये किया गया कि बंुदेलखंड में अब कोई गरीब सड़को पर नही सोयेगा। बीते 26 मई को मुख्य सचिव अनूप मिश्रा ने भी कांशीराम आवास योजना का मौके पर जाकर मुआयना किया और नजर आयी खामियों को संम्बंधित
अधिकारियों से दूर करने को कहा गया।

बताते चले कि डूडा विभाग के एपीओ पवन शर्मा और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी शारदा यादव ने अपने परिवारिक रिश्तेदारो के साथ साथ जनपद के दबंग, सरकारी कर्मचारी , व्यापारी और कुछ तथाकथित पत्रकारों के साथ लाईसेस बंदूकधारी व्यक्तियों को भी बी0पी0एल लोगो के आवास आवंटित कर दिये। साथ ही जिन लोगो को बी.पी.एल कार्ड मे आवास दिये गये उनसे 30000 से 40000 तक की अवैध धन उगाही की गयी। इसके साथ ही इन आवासो में चालीस प्रतिशत एक जाति विशेष को भी आवास आंवटित किये गये। सामाजिक कार्यकर्ता एवं सूचनाधिकार एक्टिविस्ट आशीष सागर ने कई मर्तबा सम्बंधित अधिकारियों से इस बात की लिखित और मौखिक शिकायते की लेकिन वह सब नक्कारखाने में तूती ही बनकर रह गयी। इधर बीते 16.06.2011 को हरदौली घाट के आवासों में एक मंजिला इमारत के बिना आंधी पानी गिर जाने से कालीचरण 35 निवासी कोहारा बिसंडा और कंधी निवासी अमलाहट , अजयगढ़ अपने बच्चों समेत गंभीर रूप से घायल हो गये है साथ ही बीते दो दिनो से जनपद मे आवंटनो मे की गयी धांधली को लेकर कुछ गरीबो द्वारा आमरण अनशन शुरू कर दिया गया है। अनशन में बैठे लच्छू रैदास, सावित्री, सुनीता रैकवार , रामप्यारी, रामरती, सरोज तिवारी, सुमन वर्मा , लखन रैेकवार और तुलसी ने इस भ्रष्टाचार के खुलासे की मांग की है।

वहीं भारतीय यग मैन के संपादक बाल कृष्ण पांडेय , चित्रकूट टाइम्स के संपादक राजेश पांडेय सहित दैनिक जागरण के पूर्व ब्यूरो चीफ और वरिष्ठ पत्रकार बिनोद मिश्रा तक के नाम 2 से 3 कालौनियां आवंटित की गयी है। डूडा विभाग के शारदा यादव की पत्नी के नाम भी तीन कालौनियां आंवटित है यह तो भ्रष्टाचार में की गयी धांधली की एक नजीर बस है। जब कि एपीओ डूडा ने तीस दिवस बीत जाने के बाद भी जन

(News) State govt offers Rs 10 relief cheques for drought-hit farmers of Bundelkhand

http://www.bundelkhand.in/portal/images/2010/bundelkhand-farmer-cheque.jpgWhen Sushil Kumar heard that the government was about to offer drought-hit farmers compensation in the form of monetary relief, his hopes rose. Production may have been poor, but all was not lost. With the compensation amount he would get, Kumar thought he would buy better seeds to sow for the next cropping season. And if there was still any extra left, he may even consider buying a thresher.

That was before the Lekhpal of Kumars Tendwari village came knocking at his door. The crisp yellow leaf bearing Kumar's name promised him drought compensation worth Rs 30. For a failed crop and the loss of several thousand rupees that was to be Kumar's government dole.

"The Lekhpal told me we would have to open a bank account worth Rs 500 for depositing a cheque for Rs 30. He told me to go to the Block Development Officer for clarification, if I had doubts. I spent petrol worth over Rs 100 to visit the officer, but his response was the same. Take it or leave it. I took the cheque, but didn't bother to encash it," Kumar, 45, said.

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